दिल्ली की सीमाएं इस समय चारों तरफ से सील की जा रही है इसके पीछे कारण केवल एक ही है किसान आंदोलन। इस समय किसान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं कुछ अन्य राज्यों से आंदोलन में शामिल होने के लिए लगभग दिल्ली की सीमाओं पर मौजूद है। सरकार चाहती है सभी किसान बुराड़ी स्थित डीडीए निरंकारी ग्राउंड में एकत्र हो मगर किसानों ने अपनी मांग में दिल्ली रामलीला मैदान या फिर जंतर मंतर पर एकत्र होने की मांग रखी है। सरकार अपनी मनमानी करने के लिए किसानों को बुराड़ी में ले जाकर दबाव में लेना चाहती है क्योंकि इसके बाद सरकार बुराड़ी में ही किसानों को बंधक बना सकती है, किसान यह अच्छी तरह से जानते हैं इसी कारण बुराड़ी जाने से इनकार कर दिया।
आखिर 5 दिन हो चुके हैं सरकार और किसानों के बीच बात क्यों नहीं बन पा रही है। सरकार ने सख्त रवैया अपनाते हुए हरियाणा में रोकने का प्रयास किया जो की पूरी तरह से विफल हुआ। इसके बाद सरकार ने आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर रोकने का प्रयास किया। इस पर आंदोलन कर रहे किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर ही डेरा डाल दिया। किसान उग्र आंदोलन नहीं कर रहे हैं इसी कारण पुलिस के रोकने पर दिल्ली की ज्यादातर सीमाओं पर किसानों ने अपना डेरा डाल दिया है और संदेश देने का प्रयास किया है सरकार से बात किए बगैर और अपनी मांगे मनवाने बगैर किसान आंदोलन समाप्त होने वाला नहीं है। किसान दिल्ली में किसी भी वाहन को प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं किसानों ने केवल एंबुलेंस को जाने की छूट दी हुई है इसके अतिरिक्त आंदोलनकारी किसान किसी भी वाहन को आगे नहीं जाने दे रहे हैं।
किसान आंदोलन से घबराई सरकार ने अपने कुछ मंत्रियों को किसानों को समझाने के लिए टीवी चैनल ट्विटर एवं अन्य माध्यमों से संपर्क साधने के लिए लगाया है मगर किसान अपनी जिद पर अड़ा हुआ है सरकार जब तक लिखित आश्वासन नहीं देगी इससे कम में कुछ भी समझौता होने वाला नहीं है।
केंद्र सरकार के प्रवक्ता एवं मंत्री केवल एक ही बात बार-बार कह रहे हैं कि किसानों को बरगलाया जा रहा है और केवल इस समय पंजाब का किसान ही आंदोलन कर रहा है मगर यह जानकारी सरकार की अधूरी है क्योंकि इस समय आंदोलन में पंजाब के साथ-साथ हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के किसान भी शामिल हो चुके हैं हां यह अवश्य है की आंदोलन पंजाब से शुरू हुआ मगर अब उत्तर भारत का किसान इस आंदोलन में कूद चुका है। सरकार इस समय किसानों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है क्योंकि अगर किसानों ने दिल्ली को चारों तरफ से घेर लिया तो दिल्ली के लिए हरी सब्जी दूध एवं अन्य सामग्री पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसी परिस्थिति में सरकार क्या निर्णय लेगी। सरकार इस समय दबाव में है मगर दिखाना नहीं चाहती कि सरकार दबाव में है क्योंकि सरकार के मंत्रियों द्वारा दिए जा रहे बयान मैं सरकार की नीतियों को एवं अध्यादेश को समझाने का प्रयास किया जा रहा है मगर इस समय सरकार को सीधे किसानों से बात बालवीर चाहिए मगर ऐसा नहीं हो पा रहा है। सरकार के पास अपना बहुत ही मजबूत सूचना तंत्र होता है जो कि समझाने के लिए काफी है मगर इसके बावजूद भी अगर सरकार यह कहे की किसानों को बरगलाया जा रहा है तो यह बात गले नहीं उतरती।